आखिर भाई ने बुझा दी प्यास

प्यारे पाठको मेरा नाम ‘अंकिता’ है पर घर मे मुझे सब ‘अंकी’ बुलाते है क्यूंकी मेरा बदन गोरा और गुलाबी सा है. मेरा जन्म होने के बाद एक साल बाद ही मेरे पहीले पिता ने मेरी मा को और मुझे छोड़ दिया और किसी और के साथ घर बसा लिया.तब मैं सिर्फ़ डेढ़ साल की थी. तभी मेरे मामा के दोस्त ने जिनकी बीवी लड़के को पैदा करते हुए मर गयी थी मेरे मा से शादी कर ली. वो लड़का यानी मेरा सौतेला भाई मनीष है. और मैं और मा उनके साथ रहएने लगे. मनीष भैया मुझसे 4 साल बड़ा था. पर उसने कभी मुझे सौतेला व्यवहार नही किया. जब भाई बड़ा हुआ तो पापा ने उसे पढ़ने के लिए पुणे भेज दिया. जब भाई उस साल छुट्टियों मे घर आया तो बड़ा ही खूबसूरत दिख रहा था, उसे पुणे रास आ गयी थी.

पर वो मुझसे आते ही गुस्सा हो गया क्यूंकी वो जाने के बाद मैने उसका कमरा ले लिया था. पर पापा बोले, ‘मनीष जब तक तू यहा है तब तक अंकी हमारे कमरे मे सो जाएगी.’ वो और मैं दोनो मान गये. जब उसे रात मैं पापा-मम्मी के कमरे मे सो रही थी तब रात को मुझे मा की कसमसाहट सुनाई दी और मैं जाग गयी पर सिर्फ़ थोडिसी आखें खोलके देखने लगी, और हक्का बक्का हो गयी. पापा और मा दोनो ज़मीन पे बिल्कुल नंगे लेटे थे और पापा मा के दोनो बूब्स को बारी बारी चाट रहे थे. मैं ये देख के दंग हो गयी, फिर मा ने पापा के लूँगी मे हाथ डाला और उनका लंड बाहर निकाला, इतना बड़ा और लाल था वो मैं तो घबरा गयी और फिर पापा ने उसे मम्मी की चूत पर रख के ज़ोर का झटका दिया और मा कसमसा उठी, तब मैने भी मेरे पिशब की जगह (मतलब चूत पे) गीला पन महसूस किया और मुझे कुछ अजीब सा लगने लगा.

सुबह जब बाथरूम जाके मैने मेरी पैंटी उतरी और उसे हाथ मे पकड़ा तो मुझे वहाँ चिपचिपा लगा और उसे नाक से सूंघने पर एक वासना भरी सुघनध आई. मैं तो जैसे बावरी हो गयी. उसे दिन पहली बार मैने खुद को पूरे कपड़े उतार के नंगा देखा और खुदके छोटे छोटे बूब्स को दबाया . हे क्या बताऊ मेरी हालत. उसके बाद मैने चार दिन मा और पापा का वो खेल रोज रात को चुपके से देखा. अब मैं 19 की होगई थी और पूरी जवान लगने लगी थी. पर मुझे किसी लड़के ने अभी तक छुआ नही था. मेरा भाई भी अब 23 का हुआ था और ब्कॉम कर रहा था. पापा ने मुझे भी भाई के साथ पुणे उसीके कॉलेज के लिए भेज दिया.

भाई और मैं जब पुणे पहुचे तब जोरो की बारिश चल रही थी और हम दोनो भीग गये थे. भाई तब एक चाल मे रहता था जिसमे एक छोटा सा कमरा किराए पे लिया था. कमरे मे ही टाय्लेट और बाथरूम था पर बाथरूम को दरवाजा नही था. भाई अकेला होने के वजह से उसे तकलीफ़ नही हुई पर अब मुझे वहाँ नहाने को परेशानी होगी ये मैने कहा तो उसने कहा, ‘ जब तुम नहाने जाओगी तब मैं कमरे क बाहर चला जाउन्गा और तुम अंदर नहा लेना, फिर दरवाजा खोलना.’ मैं इस बात पे मान गयी. दूसरे दिन हम कॉलेज पहुचे,उसने मेरा दाखिला करा दिया. और हम रोज़ साथ मे ही घर से कॉलेज जाते और साथ मे ही घर आते. आते आते कभी हम बाजार ले आते और मैं घर मे ही खाना पकाती और भाई भी मुझे हेल्प करता था. इस दौरान ही मुझपे जवानी चढ़ने लगी थी. कॉलेज मे हमे बहोट लोग बाय्फ्रेंड-गर्लफ्रेंड ही समझते थे. मुझे भी वो अच्छा लगता था. जब कभी भाई मुझे खाना बनाने मे हेल्प करता तो उसका हाथ कभी कभी मेरे स्तानो को छू जाता और मेरे बदन मे एक ही सिरसिरी भर जाती, पर ये वो जानभुज के करता या अंजाने हो जाता ये उसे ही पता.

ऐसे ही दो महीने बीत गये. सेप्टेंबर मे हमारे घर के पास एक मेला लगा, मैने भाई को कहा चलो मेला घूम आते है, भाई भी तैयार हुआ और हम शाम को मेला देखने चले गये. घूमते घूमते हमे भाई के एक टीचर मिल गये, उन्हे लगा मैं भाई की पत्नी हू, और वो कुछ सुनने के पहेले ही कह गये, ‘जोड़ा खूब जँचता है, खुश खबरी जल्दीही देना.’ और्र मैं और भाई शरम के मारे पानी पानी हो गये. आगे हम दोनो आकाश झूले मे बैठे, जैसे झूला उपर जाता मैं भाई को कस क पकड़ लेती थी क्यूंकी मुझे बहुत डर लगता है. तब मेरे स्तन भाई के कंधे को चिपक जाते, और जाँघ से जाँघ चिपक गई थी. मेरी आखे बंद थी और मेरे सलवार के उपर से मेरे स्तन दिख रहे थे, भाई उन्हे आखे फाड़ के देख रहा था (ये उसने मुझ बाद मे बताया) जब हम झूले से नीचे उतरे तो भाई मेरी तरफ अलग ही नज़र से देख रहा था.

घर जाते जाते बारिश ने हमे घेर लिया और मैं और भाई पूरी तरह भीग गये. मेरे सलवार सफेद थी और भीगने के कारण मेरी ब्रा क्लियर नज़र आ रही थी जिसे भाई घूर रहा था. जैसे तैसे हम रूम पहुचे और दरवाजा बंद कर लिया. भाई ने कहा, “अंकी तुम कपड़े बदल लो मैं बाहर खड़ा रहता हू.’ तो मैने कहा,’भाय्या रहने दो आप पीठ कर के खड़े हो जाओ, मैं झट से कपड़े बदलती हू.’ वो मान गया. मैं कपड़े बदल रही थी, जैसे ही मैने मेरा सलवार उतारा मुझे मनीष की हल्की सिसकी सुनाई दी, मैं समझ गयी की वो मुझे देख रहा है. मेरे भी बदन मे एक लहर आ गयी और मानो एक सेकेंड मे मेले की बाते और मा-पापा का सेक्स मेरे आखो के सामने आ गया और मुझे नीचे गीला लगने लगा. बाद मे मैने उसके तरफ देखा और कपड़े बदले पर उसने नही देखा. थोड़ी देर बाद उसने उसके कपड़े बदले तब मैं चोरी से उसकी अंडर पैंट को देखा तू वो एक तंबू जैसे लग रही थी. मैं समझ गयी के भाई का लंड खड़ा हो गया है.

उस रात मैं रोज़ की तरह नीचे ज़मीन पे सो रही थी और भाई पलंग पे. वो पलंग पे पेट के बल सोने का नाटक कर रहा था और मेरे उभारों को देखे जा रहा था. मैने भी उसे उतेज़ित करने के लिए पल्लू निकाल दिया था, ताकि उसे मेरे स्तानो क बीच की खाई दिखे. उस रात मैं बहोट देर तक सोचती रही की ये सही है या ग़लत, वो मेरे चूत की खुजली भाई को सोच सोच और ही बढ़ रही थी. वैसे भी वो मेरा सौतेला भाई था और उसके तरफ भी आग लगी थी, पर उसकी हिम्मत नही थी कुछ करने की. फिर मैने ही एक प्लान बनाया.वो ऐसा, दूसरे दिन सुभह जब मैं नहाने निकली तो भाई बाहर जाने लगा, मैने कहा, ‘मनीष भाय्या, आप यही रूको, जब आप बाहर जाते हो तो बाजू के लोग, बाद मे मुझे घूरते है.’ तो भाई रुक गया और पलंग पे पीठ कर के बैठ गया. मैने पल्लू का परदा किया और नहाने लगी. नहाते वक़्त मैं गाना गाने लगी, “सजना है मुझे, सजना के लिए…” तो भाई ने देखे और झट से फिर मूड गया.

मैने जानबूजके टवल पलंग पे ही रखा था. नहाना होने के बाद मैने भाई को कहा की मुझे टवल देना, तब मैं स्टूल पे बैठ के दोनो पैर के बीच स्तन छुपाके बैठी थी. और मेरा कुर्ता गीला होने के वजह से मेरी पैंटी और गीली भरी हुई जंघे दिख रही थी. मैने परदा हल्के से खिछा और टवल लेने के लिए थोड़ी उठी. उठाते ही मेरा लेफ्ट स्तन पूरा भाई को दिखा और उसके मूह से सिसकारी निकले. मैने ऐसा बर्ताव किया की ये अंजाने मे हुआ और बैठ गयी, बैठते ही उसे मेरी पैंटी दिखी. और उसके पैंट मे मुझे हलचल दिखी. मैं जान गयी की तीर निशाने पे लगा है. एसी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |उस दिन मैं सोचती रही के अब आगे क्या करना है और उस रात खाना खाने क बाद, मैने भाई से कहा “ तुम सो जाओ मैने सहेली से नोट्स लिए है जो मुझे कंप्लीट करने है.”

तो वो सोने की तायारी करने लगा और मैं नीचे बैठ क नोट्स कंप्लीट करने लगी. वो फिरसे पलंग पे पेट के बाल लेट के सो रहा था. मैं नोट्स लिखते वक़्त थोड़ी झुक के लिख रही थी जिससे मेरी स्तानो के बीच की खाई उसे थोड़ी थोड़ी दिख रही थी. मैने सोचा कि भाई को गरम करने का ये चान्स छोड़ना नही चाहिए इसलिए मैने गर्मी हो रही है ये दिखा के पल्लू निकाल दिया और थोड़ा और झुक के लिखने लगी. उसकी थोड़ी सिसकी से मुझे पता चल गया की चिंगारी ने आग पकड़ ली है.  भाई भी सोने का नाटक कर रहा था और मुझे देख रहा था. ऐसे ही 20-25 मिनिट बीत गये. मैने थोड़ा सोचा और एक बार भाई की तरफ देखा तो झट से उसने आखे बंद की और जताया कि वो सो रहा है. मैं झट से उठी और मेरा कुर्ता उतार दिया. ये भाई ने कभी सोचा ही नही था कि मैं ऐसा कुछ करूँगी. उसे तो जैसे 440वॉल्ट का करेंट ही लग गया. उसने उसकी उक्सुकता थोड़ी कम की और सोने का नाटक चालू रखा. पर यह मेरे चूत से पानी बहना शुरू हो गया था.

वो मेरे दोनो स्तनो को घूर रहा था, मैं भी उसका मज़ा ले रही थी. और 10-15 मीं तक मैने कभी मेरे स्तनो पे का पसीना कभी कुर्ते से तो कभी टवल से पोछा जिससे भाई और उत्तेजित हो. मेरा तो बुरा हाल था, उत्तेजना के कारण मेरे दोनो स्तन कड़क हो गये थे और सीधे हो गये थे. मैने सोचा की अब और खिचना बेकार है, और उठकर सूसू करने के लिए बाथरूम गयी, और किसी तरह का परदा नही लगाया और झट से पैंट उतारी और पैंटी भी उतारी, ये सब भाई देख रहा है ये सोचके और मुझे पता था कि वो ये देख ही रहा होगा. पैंटी उतारने के बाद नीचे बैठ कर मूतने लगी ताकि मेरी गांद का घेरा और छेद भाई को सॉफ दिखे. भाई तो जैसे सातवे आसमान पर था. मैं ज़ोर देके मूतने लगी ताकि मेरे मुतनी की ज़ोर से आवाज़ हो. उस रात के सन्नाटे मे वो आवाज़ कुछ असर कर गयी. मैं बाहर आई और एक टी-शर्ट पहन लिया.


मैं सोने के लिए गयी तो बारिश शुरू हो गयी और जहा मैं सोती थी वही से पानी टपकने लगा. और मेरी रज़ाई और चादर भीग गये. पानी की आवाज़ से भाई ने भी नींद से उठने का नाटक किया और बोला “ कोई बात नही अंकी यहा आ जा उपर.कल छत ठीक कर लेंगे.” मुझे जैसा चाहिए था वैसा ही हुआ और मैं झट से पलंग पे लेट गयी. भाई से थोड़ा अंतर ले क सोने लगी(वैसे अब हम दोनो सोने का नाटक कर रहे थे) मैने थोड़े देर बाद नींद मे हू ऐसा दिखाते भाई के पेट पर हाथ रख दिया और थोड़ा थोड़ा हाथ उपर नीचे करने लगी. जिस से उसका लंड उत्तेजित हो गया और उसके पाजामे मे तंबू बनाने लगा. उसने भी उसका हाथ मेरे छाती पर रख दिया और स्तानो पे फेरने लगा. अब आग पूरी लग गयी थी और बस मंज़िल थोड़ी ही दूर थी. तभी वो थोड़ा उठा और उसका पाजामा निकाल के चड्डी भी निकाल दी. तब मेरा हाथ उसके जाँघ को छु रहा था. वो मेरे तरफ मुड़ा और मुड़ते ही उसका लंड मेरे हथेली मे आ गया. मैने भी उसे थोड़ा हल्केसे दबाया और उसे मुट्ठी मे ले लिया, और थोड़ा हिलाया.

तभी भाई ने झट से मेरे एक स्तन को ज़ोर से दबाया. बस अब हम दोनो क बीच की सब दीवारे टूट गयी और हम एक दूसरे को लिपट गये. भाई ने मेरे होंठो को चूमा और एक फ्रेंच किस लिया. हाई क्या बताऊ वो एहसास. फिर भाई ने धीरे धीरे मेरे स्तन दबाए, मैने भी उसके लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया. भाई ने मेरा कुर्ता और सलवार उतार दिया अब मैं सिर्फ़ पैंटी मे थी . मैने भी भाई का टी-शर्ट उतार दिया और उसकी बालो वाली छाती चूमने लगी. भाई मेरे स्तानो को मूह मे लेके चूसने लगा, कभी एक कभी दूसरा. मेरे मुहसे सिसीकिया निकालने लगी, “हे… अफ… आ…और ज़ोर्से…” ये सुनके भाई और ज़ोर्से चूसने लगा. मैं भी उसका लंड हाथ से ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी, जिसके वजह से भाई भी सिसकिया निकालने लगा… अब मैने उल्टा होकर उसका लंड मूह मे ले लिया और वो मेरी चूत चाटने लगा… हम 69 के पोज़िशन मे थे और मुखमैथून का आनंद ले रहे थे, मेरी चूत झड़ने लगी और भाई ने सारा पानी पी लिया. मैने भी उसका पानी झड़ने के बाद पी लिया… वाह क्या स्वाद था उसका… हम दोनो का पानी छूटने की वजह से हम थोड़े सुस्त हो गये और एकदुसरे की बाहों मे लिपट के लेटे रहे.

 थोड़ी देर बाद भाई का लंड फिरसे खड़ा होने लगा, जब उसने मुझे दिखाया तो मैं खुश हो गयी और उसे मूह मे लेकर धीरे धीरे चूसने लगी वो मेरे स्तानो को दबाने लगा. भाई का लंड अब पूरे जोश मे आगेया था, और इस बार मैं उसे मुझमे समाने के लिए बेताब थी. मैं झट से बिस्तर पे लेट गयी और भाई को चढ़ने को कहा. भाई ने भी पोज़िशन ली, और मेरे उपर आ गया, पर उसे मेरे चूत के छेद मे डालते ही नही आ रहा था. तो मैने मेरे कुल्हो के नीचे तकिया रखा और टांगे फैला दी, जिससे मेरा छेद थोड़ा खुल के दिखने लगा. भाई उस पे आया और एक ज़ोर से धक्का लगाया, जिस से उसके लंड का सूपड़ा मेरी चूत चीरता हुआ अंडर चला गया. मैं ज़ोर से चिल्लाई पर उतने मे भाई ने मेरे होंटो मे उसके होंटो को डालके चूमा. मुझे बहुत दर्द होने लगा और मैं रोने लगी, तो उसने उसका लंड बाहर निकल लिया. जब मैने अपनी नन्ही चूत को देखा तो उससे खून निकालने लगा था, और ऐसा दर्द हो रहा था जैसे किसीने उसे फाड़ दिया हो… 

भाई ने मुझे समझाया, “अंकी, ऐसा तो होता ही है. आज तू कली से फूल बन गयी है.” भाई के समझने से मुझमे थोड़ा जोश आया और मैं उसे बोली, “मनीष मुझे बाहो मे लेलो.” उसने झट से मुझको लिपट लिया. अब भाई ने मुझे फिरसे लेटा दिया और अपनी हाथ के उंगली को मेरी चूत मे डाला और आगे पीछे हिलाने लगे. इससे मुझे फिर से उत्तेजना होने लगी और मैं तयार होने लगी, थोड़ी देर ऐसे करने के वजह से मेरे चूत से पानी आने लगा और भाई ने उसे पी लिया और मेरी चूत ज़बान से चटकार सॉफ करने लगा. अब मुझेसे रहा नही जा रहा था. सो मैं ने भाई को उपर आने का आमंत्रण दिया. वो झट से उपर आया पर इश्स बार धीरे धीरे उसका लंड चूत मे डालने लगा.

दो-तीन झटको मे ही उसका आधा लंड मेरी चूत मे चला गया. भाई अब आगे पीछे हिलने लगा, और एक हाथ से मेरा स्तन दबाने लगा. अब मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चिल्लाने लगी, “फाड़ दो इश्स साली चूत को… भैया… अपनी बाहें को सारा सुख दे दो… और ज़ोर्से डालो… और… इश्स… अफ…” मेरे ऐसे कहेने से भाई भी जोश मे आगेया और ज़ोर्से झटके मारने लगा… 5मीं बाद मुझे लगा के मैं झड़ने वाली हूँ, मैं मनीष से बोली “भाई मैं झधने वाली हू… तुम भी साथ मे ही झड़ो और मुझमे ही झड़ो, मैं तुम्हारा पूरा रस अपने मे समा लेना चाहती हू…” भाई ने वैसा ही किया और हम साथ ही झाडे. वो मेरे बगल मे लेट गया. और हम दोनो को नींद आ गयी.

सुबह जब मैं उठने लगी तो मुझसे उठे नही जा रहा था. बहुत कोशिश करने के बाद मैं खड़ी हुई पर जैसे बाथरूम जाने के लिए पैर बढ़ाया लड़खड़ा गयी और नीचे बैठ गयी. मेरी पहेली चुदाई के कारण मुझे बहुत दर्द हो रहा था और इसके वजह से मैं चल नही सकती थी. मैं वही पलंग पे बैठ गयी. भाई ने कहा “अंकी, तुम दो-तीन दिन घर मे ही आराम करो जब ठीक हो जाओ तब ही कॉलेज जाना.” ये कहा और मेरे पास आ के मुझे एक चूमा दे के चला अपने कलाज के लिए चला गया. उस दिन के बाद मैं और भाई बही-बहन ना होके पति-पत्नी है ऐसे रहेने लगे, जब तक मेरी शादी नही हुई. पर जब भी हम दोनो को अकेला समय मिलता है तब हम फिरसे एक दूसरे के बाहों मे खो जाते है. प्लीज अपने अपने कमेंट जरुर लिखियेगा |

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