ज़ोर से क्यों आराम से करो ना 2

“क्यों घूमू मैं.”

“घूम जाओ प्लीज़ मेरा पेट फटा जा रहा है.”

“पेट फटा जा रहा है पर क्यों, ज़्यादा खा लिया था क्या.”

“बाते मत बनाओ, एक तो एन वक्त पर आ कर मुझे टोक दिया अब बाते बना रहे हो, थोड़ा घूम जाओगे तो क्या बिगड़ जाएगा तुम्हारा.”

“मेरे सामने कर लेगी मूत तो तेरा क्या बिगड़ जाएगा. वैसे भी तेरी गांड मैं देख ही चुका हूँ. कर ले ज़्यादा शर्मा मत.”

मैं शरम से पानी पानी हो गयी. “नरक में जाओगे तुम, तुम्हे शरम नही आती.” मैने नज़रे झुका कर कहा.

“मुझे तो नही आती पर तुम बहुत शर्मा रही हो.”

“घूम जाओ ना प्लीज़” मैने मक्खन लगाते हुवे कहा क्योंकि मेरा पेट फटा जा रहा था.

“ ठीक है मैं घूम जाता हूँ. कर ले आराम से.” वो घूम कर खड़ा हो गया.

“पीछे मत मुड़ना.” मैने डब्बे को सरकाते हुवे कहा. मैने आराम से तस्सली से किया पेसाब मगर मेरी नज़रे उसी पर टिकी थी. जब मेरे पेसाब की आहट बंद हो गयी तो वो तुरंत घूम गया. मैने बड़ी जल्दी की साडी नीचे करने की मगर फिर भी उसने मेरी गुलाबी चूत देख ही ली.”

“हाई राम क्या फांके हैं तेरी चूत की, खाने का मन कर रहा है.” उसने बेशर्मी से आँख मारते हुवे कहा.

मैं तो शरम से पानी पानी हो गयी. मुझसे कुछ भी बोले नही बन रहा था. मेरी लाख कोशिसो के बावजूद उसने मेरी योनि देख ही ली थी और अब ऐसी बाते कर रहा था. साथ ही साथ वो बेशर्मी से अपनी पॅंट में तने हुवे तंबू को सहला रहा था. मेरा तो शरम से चेहरा लाल हो गया था. अगर बाहर लोग ना होते तो तुरंत वहाँ से चली जाती मैं.

“एक बार एक अँग्रेजन की ली थी मैने. उसकी चूत की फांके भी बिल्कुल तेरी चूत जैसी थी. बिल्कुल गोरी चित्ति. एक भी बॉल नही था उसकी चूत पर.” |  मैं तो और भी शरम से लाल हो गयी. अंजाने में मेरे मूह से निकल गया, “अंग्रेज कहाँ मिली तुम्हे.”

“गाँव में आई थी वो अपने पति के साथ. उसका पति कोई क्या कहते हैं रिचर्च कर रहा था.”

“रेचर्च नही रिसर्च.”

“हां हां कुछ ऐसा ही. मैं अनपढ़ गँवार क्या जानू ये सब. जो भी हो बहुत मज़ा दिया था उसकी गुलाबी चूत ने. तेरी चूत ने उसकी याद दिला दी आज.”

मुझे यकीन नही हो रहा था कि कोई अँग्रेज़ लड़की इस सुवर के चक्कर में आ सकती है. खैर मुझे कोई मतलब नही था इन बातों से.

“यार मुझे भी पेसाब आया हुआ है. मैं क्या करूँ अब.”

“थोड़ी देर रुक जाओ. लोग जाते ही होंगे.”

“मुझे नही लगता कि कोई हिलेगा यहाँ से अभी. मेरा भी पेट फटा जा रहा है. मैं करने जा रहा हूँ इस डब्बे में.” कहते हुवे उसने अपनी ज़िप खोल ली. कही मुझे उसका औजार ना दिख जाए इसलिए मैं तुरंत घूम गयी. उसने आराम से बैठ कर डब्बे में पेसाब किया.   “अब हमारे पेसाब मिल गये आपस में. काश के तेरी चूत से मेरा लंड भी मिल जाए ऐसे ही हिहिहीही.”

मैं तो हैरान रह गयी उसकी बात पर. वो मूत कर खड़ा हो गया. मैं भी वापिस घूम गयी. मुझे लग रहा था कि कही वो अपना लिंग बाहर ही निकाले ना खड़ा हो. मगर सूकर है वो अंदर था. मगर उसने अंदर से ही तंबू बना रखा था उसकी पॅंट में. उसे देख कर यही लगता था कि पॅंट के पीछे कोई भारी भरकम चीज़ है. “कहो तो निकाल लूँ बाहर.” उसने बेशर्मी से तंबू को सहलाते हुवे कहा.

मैने तुरंत शरम से अपनी नज़रे घुमा ली.

“लगता है तू देखना चाहती हैं मेरे लौदे को मगर कहने से शर्मा रही है. ले निकाल रहा हूँ तेरे लिए मैं इसे.” और उसने अपनी ज़िप खोलनी शुरू कर दी.

“नही नही ऐसा कुछ नही है. मैं तो ऐसे ही बस.”

“ऐसे ही बस क्या? बोलो नही तो निकाल लूँगा.”

“हैरान थी इतने बड़े तंबू को देख कर.” मुझे बोलना ही पड़ा. लंड बड़ा हो तो ऐसा ही तंबू बनता है हिहिहीही.” और उसने एक झटके में अपने लिंग को मेरी आँखो के सामने झूला दिया. फिर मैने जो देखा मेरी तो आँखे फटी की फटी रह गयी. मैने सपने में भी इतने बड़े और मोटे लिंग की कल्पना नही की थी. अभी तक मुझे अमर का ही बड़ा लगता था. मगर अब मेरे सामने अमर के लिंग से भी बड़ा और मोटा लिंग झूल रहा था. वो बिल्कुल विसालकाय राक्षस की तरह मेरे सामने ताना था जैसे की मुझे खा जाएगा. उसका सूपड़ा कुछ ज़्यादा ही मोटा था. अमर के सूपदे से भी मोटा. लिंग के बसे के नीचे उसके आँड लटक रहे थे जो कि बालों से घिरे थे.  दोस्तो आप सोच रहे होंगे कि ये अमर कौन है तो मैं आपको बता दूं कि एक बार युवराज का चचेरा भाई अमर शहर मे एग्ज़ॅम देने आया था तो वो हमारे ही यहाँ ही रुका था . अमर बड़ा हरामी था उसने मुझे अपने जाल मे फाँस लिया था . और मेरी चुदाई भी कर दी थी . दोस्तो वो कहानी फिर कभी . अब आते है असली कहानी की तरफ…

“देखा रह गयी ना दंग. जो भी देखता है दंग रह जाता है. वो अँग्रेज़ भी दंग रह गयी थी देख कर हिहिहीही बिल्कुल तेरी तरह.”

और मैं सकपका गयी और खुद को कोसने लगी कि क्यों मैं उसके उस को यू देख रही थी. मैने उसके लिंग से नज़रे हटा ली.

“तू तो बुरा मान गयी. देख ना जी भर के ये तेरे लिए ही तो खड़ा है.”

मैने उसकी तरफ देखना सही नही समझा क्योंकि मुझे कुछ कुछ हो रहा था. मैं अभी भी हैरान थी कि आख़िर किसी का इतना बड़ा कैसे हो सकता है. मैने बचपन में एक बार एक गधे को देखा था जो कि एक गधि पर चढ़ने की कोशिस कर रहा था. उसका मोटा और लंबा लिंग आज फिर मेरी नज़रो में दौड़ गया. यू नरेश भी उस गधे से कम नज़र नही आ रहा था.

“हाई राम ये मेरे अंदर घुसा तो मेरी तो जान निकल जाएगी.” मैने सोचा मगर फिर मुझे लगा च्ीी मुझे ऐसी गंदी बाते नही सोचनी चाहिए.  “दीखा ना अपनी चूत की फांके. देख मैं भी तो तुझे दीखा रहा हूँ.” “मैं तुम्हारी तरह बेशरम नही हो सकती हूँ. और मैने तो तुम्हे नही कहा दीखाने को. वापिस अंदर कर लो इसे.” मगर ये बोलते हुवे भी मेरी नज़रे बार बार उसके विशालकाय लिंग पर जा रही थी बार बार.

“खुद तो बार बार देख रही है मेरे लॉड को और मुझे कुछ भी नही दीखाना चाहती. ठीक है मैं जा रहा हूँ बाहर.” उसने लिंग को वापिस पॅंट में डाला और चलने लगा.

“रूको कहाँ जा रहे हो. अपनी नही तो मेरी तो चिंता करो. मेरा घर बर्बाद हो जाएगा.” मैं गिड़गिडाई.

“मुझे क्या मिल रहा है यहाँ खड़े हो कर कुछ भी तो नही. तुम तो मज़े से मेरे लंड के नज़ारे ले रही हो पर मुझे क्या मिल रहा है.”

“देखो मुझे कोई नज़ारा लेने का शॉंक नही है. तुम चुपचाप खड़े रहो बस.”

“नही मुझे तुम्हे नंगा देखना है, नही तो मैं जा रहा हूँ.”

ये सुन कर मेरी तो शरम के मारे जान निकल गयी और उस पर गुस्सा भी आया.

“ये क्या कह रहे हो. बाहर इतने लोग घूम रहे हैं और तुम्हे ये सब सूझ रहा है.”

“चिंता मत करो वैसे भी हम इस आल्मिरा के पीछे हैं. अंदर कोई झाँकेगा भी तो बाहर से झाँक कर ही चला जाएगा, क्योंकि उसे लगेगा कि केवल स्टोर रूम है.”

“हां पर मैं ये नही कर सकती, और क्यों करूँ मैं ये सब?”

“ना करो मैं जा रहा हूँ.”

अब मैं मुसीबत में फँस गयी. ना ना करते बन रहा था ना हां करते. वो धीरे धीरे दरवाजे तक पहुँच गया. मैने धीरे से आवाज़ लगाई रूको. वो तुरंत मूड कर आ गया.   “क्या फ़ैसला किया तुमने?”

“ठीक है तुम देख लो जो देखना है मेरा. पर इसमे कपड़े उतारने की क्या ज़रूरत है.”

“ज़रूरत है, बिना कपड़े उतारे औरत खूबसूरत नही लगती हिहीही.”

मैं तो शरम से मर गयी.

“अब जल्दी करो नही तो मैं शरम से मर जाउन्गा.

“क्या तुमने अँग्रेज़ को भी ऐसे ही फँसाया था. मैने उसे बातों में लगाने की कॉसिश की.

“पहले अपना ब्लाउस उतारो फिर बताता हूँ.”

“उतार दूँगी पर वादा करो तुम छुओोगे नही.”

“ठीक है वादा करता हूँ.”

मैं सहमी से खड़ी रही उसके सामने.

“सोच क्या रही है जल्दी कर.” वो बोला और अपनी ज़िप खोलने लगा. उसने फिर से अपने लंबे और मोटे लिंग को बाहर निकाल लिया.

मैने काँपते हाथो से अपने ब्लाउस के हुक खोले और धीरे धीरे उसे सरकाने लगी. उसकी आँखे मेरी छाती से ही चिपकी थी. मैं तो शरम से मरी जा रही थी. मैने धीरे धीरे ब्लाउस उतार दिया. मेरे दूध जैसे उभार उसकी आँखो के सामने थे. मैने ब्रा नही पहनी थी ब्लाउस के नीचे क्योंकि ब्लाउस ऑलरेडी ब्रा का काम कर रहा था. उसकी तो आँखे चमक उठी मेरे उभार देख कर. उत्तेजित तो मैं भी थी थोड़ा थोड़ा और ये उत्तेजना मेरे तने हुवे उभारों से सॉफ झालक रही थी. वो भी इसे भाँप गया और बोला.

“तू भी गरम हो रही है मेरी तरह. देख कैसे तनी हुई हैं तेरी चुचियाँ.” वो अपने लिंग के सूपदे को सहलाने लगा. उसका सूपड़ा उसके प्रेकुं के कारण चमक उठा था. मैं तो शरम से मरी जा रही थी.  “चलो अब ये साडी भी उतारो.”

“देखो बाहर लोग हैं, साडी उतारनी ज़रूरी है क्या.”

“हां ज़रूरी है मेरी जान तुम नही समझोगी. उतारो जल्दी नही तो मैं चला.”

मेरी दुखती रग अब उसके हाथ में थी. मरती क्या ना करती मुझे साडी उतारनी पड़ी. मेरे हाथ काँप रहे थे. अब मैने साडी उतार कर एक तरफ रख दी. अब मैं सिर्फ़ पेटिकोट में थी.

“चल ये भी उतार अब.”

मैं सहम उठी. पूरी नंगी होने का डर सता रहा था मुझे. उसके साथ स्टोर में नंगा होना ख़तरे से खाली नही था. मैने उसे बात में उलझाने की कोशिस की.

“तुम्हारा ये मुझे घोड़े की याद दिलाता है.” मैने कहा.

मैं तो शरम से पानी पानी हो गयी.

“चल उतार अब ये पेटिकोट भी और पॅंटी भी.”

अब समझ में नही आ रहा था कि उसे किस बात में उल्झाउ. “उतारती है कि नही या मैं जाउ.” वो बोला. मैं काँप उठी. अब कोई चारा नही था. मैं आधी नंगी थी ऐसे में वो बाहर निकला और कोई अंदर आ गया तो मैं बर्बाद हो जाउन्गि. मैने पेटिकोट का नारा खोला और धीरे से उसे नीचे गिरा दिया. वो मेरे पैरों में गिर गया. मैने पैर उस से निकाल लिए और पेटिकोट उठा कर एक तरफ रख दिया. अब मैं सिर्फ़ पॅंटी में उसके सामने खड़ी थी. मैं घबरा रही थी, शर्मा भी रही थी पर ना जाने क्यों एग्ज़ाइटेड भी थी. ये एग्ज़ाइट्मेंट मेरी गीली पॅंटी से सॉफ नज़र आ रही थी. नरेश ने अपने सूपदे पर थूक लगाया और उसे रगड़ना सुरू कर दिया. 

कहानी जारी है …..

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