ज़ोर से क्यों आराम से करो ना – 3

“हाई क्या जवानी है तेरी. अब ये पॅंटी भी उतार दे तो मज़ा आ जाएगा.”

“अब ये तो रहने दो मेरे बदन पर मुझे शरम आ रही है.” मैने कहा

“नही मेरी जान ये तो उतारनी ही पड़ेगी तुम्हे वरना मुझे मज़ा नही आएगा.”

मैने काँपते हाथों से पॅंटी को एक धीरे धीरे नीचे सरकाया. जब मेरी योनि का उपरी हिस्सा उसकी नज़रो की सामने आया तो वो अपने लिंग को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा. मैने धीरे धीरे पॅंटी नीचे सरका दी घुटनो तक.

“वाह क्या नज़ारा है. यही है जन्नत. नही नही ये चूत तो उस अँग्रेजन की चूत से भी प्यारी है. इसकी फांके बिल्कुल जुड़ी हुई हैं आपस में जैसे की कुँवारी चूत की होती है.

अमर भी खोल नही पाया इन फांको को. और इन्हे देख कर लगता है कि युवराज का छ्होटा सा लंड है. है ना सच कह रहा हूँ ना मैं.”

“तो हर किसी का इतना बड़ा होता है क्या. युवराज का जितना भी है मैं खुस हूँ उसके साथ.”

“खुस तो रहेगीं ही तू क्योंकि पत्नी है तू उसकी मगर तेरी चूत वो मज़ा नही ले पाएगी जिसकी की ये हकदार है. यार मैं लूँगा तेरी अब.”

मैं तो शरम से लाल हो गयी. बात ही कुछ ऐसी की थी उसने. मेरे पूरे शरीर में बीजली सी दौड़ गयी थी.

“देखो ऐसी बाते मत करो. मुझे कुछ कुछ होता है. और तुमने वादा किया था कि छुओोगे नही मुझे.”

“तेरी जैसी हसिनाओं को चोदने के लिए झुटे वादे करने पड़ते हैं वरना मेरे जैसे को तेरे जैसी भोसड़ी कहाँ मिलेगी.” वो बोला और आगे बढ़ कर मेरे से लिपट गया.

“आहह क्या कर रहे हो तुम छ्चोड़ो नही तो मैं चिल्लाउन्गि.”

“चील्लाओ ज़ोर से चील्लओ पर देख लो तुम्हारा ही बिगड़ेगा जो भी बिगड़ेगा हिहिहीही.”

उसने बोला और मेरी योनि की फांको को मसल्ने लगा. ना चाहते हुवे भी मेरे शरीर में बिजली की एक लहर सी दौड़ गयी.

उसकी मोटी मोटी उंगलियाँ मेरी योनि की फांको को कभी रगड़ रही थी और कभी फैला रही थी. मैं तो मदहोश होती जा रही थी.

“क्यों कर रहे हो तुम मेरे साथ ऐसा आआहह छ्चोड़ो मुझे.”

मैने नितंबो को झटका देते हुवे कहा. दरअसल मेरी योनि मचल उठी थी उसकी उंगलियों की चुअन के कारण और अब मैं खुद ही हिल हिल कर उसके हाथो को और ज़्यादा फील करना चाह रही थी अपनी योनि पर.

अचानक उसने मेरी योनि में उंगली डाल दी. “आआहह नही प्लीज़ आहह.”

वो मेरे आगे घुटनो के बल बैठ गया. उसकी उंगली धँसी हुई थी मेरी योनि में और मैं अपने नितंबो को आगे पीछे हिला रही थी.

चाहती तो हट सकती थी पीछे मगर नही मैं हट ही नही पा रही थी. मैने उसकी तरफ देखा तो वो मेरी तरफ मुस्कुरा रहा था.

“अब ये चूत मेरी है, मुझे इसे मारने से कोई नही रोक सकता.” उसने अपने एक हाथ से अपने मोटे लिंग को सहलाते हुवे कहा. मैने शरम से आँखे बंद कर ली.

अचानक वो रुक गया और मैने सवालिया नज़रो से उसकी तरफ देखा. उसकी नज़रे कुछ ढूंड रही थी.

तभी उसकी नज़र एक बोरी पर गयी. उसने वो उठा ली और फर्स पर बिछा दी.   “कुतिया की तरह मर्वओगि या सीधे लेट कर.” वो बेशर्मी से बोला.

मैं शरम से लाल हो गयी. “देखो कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी.”

“कोई नही आएगा. वैसे भी हम इस आल्मिरा और संदूक के पीछे हैं.” उसने कहा और मेरे उभारों को मूह में ले लिया.

मैं कराह उठी और उसके सर को थाम लिया दोनो हाथो से. ऐसा लग रहा था मैं तुरंत झाड़ जाउन्गि. पर मैं खुद को थामे रही.

अचानक वो हट गया और बोला, “कैसे दोगि बोलो ना.”

“जैसे तुम चाहो,” मैने बोल कर चेहरा ढक लिया हाथों में.

अचानक उसके हाथ फीसलते हुवे मेरे नितंबो तक जा पहुँचे.

“अरे वाह ये तो बड़े मुलायम हैं. ज़रा घूमना तो.”

मैं शर्मा गयी. उसने मुझे अपने आगे घुमा दिया और वो घुटनो के बल बैठ गया और मेरे नितंबो की दोनो गोलाईयों को सहलाने लगा.

“ओह यार क्या गांड है तेरी. ऐसी गांड आज तक नही देखी मैने.”

मैं शरम से लाल हो गयी.

उसने मेरे नितंबों को फैलाया और अपनी नाक को उनकी दरार में फँसा दिया.

“उम्म्म क्या खुसबु है. बिल्कुल सॉफ रखती हो तुम गांड अपनी. यार मेरा मूड बदल गया है. मैं तेरी गांड मारूँगा अब.” उसने मेरी गांड के छेद पर उंगली घूमाते हुवे कहा.

मैं तो घबरा गयी. मैने अभी तक अमर के लिंग से हुए दर्द को भूली भी नही थी और ये वही करने की बात कर रहा है.. और तो और इसका लिंग अमर से मोटा और लंबा है..

“मैने अभी किसी को भी नही दी है ये, प्लीज़ आगे से ही कर लो.” मैने उस से झूठ बोलते हुए कहा

“फिर तो और भी मज़ा आएगा. कुँवारी गांड का मज़ा ही कुछ और होता है.” वो बोला और मेरी गांड में उंगली डाल दी.

“आआहह नही…..दर्द हो रहा है.” मैं धीरे से बोली.

“चलो तुम लेट जाओ पेट के बल, मैं तुम्हारे उपर लेट कर आराम से गांड मारूँगा.”

“नही नही मुझसे नही होगा ये, प्लीज़ आगे से कर लो ना. जब उंगली से ही दर्द हो रहा है तो तुम्हारा ये तो मेरी फाड़ ही देगा.” मैं गिड़गिडाई.   “नही फटेगी तुम्हारी. मैं खूब थूक लगा कर करूँगा. चिंता मत करो लेट जाओ.”

उसने मुझे बोरी पर पेट के बल लेटा दिया. मेरा मूह फर्स पर पड़ी मिट्टी पर आ टिका क्योंकि बोरी छ्होटी थी और मैं सिर्फ़ आधी ही बोरी पर थी. मैने तुरंत मूह सॉफ किया.

मेरे लेटते ही नरेश मेरे उपर लेट गया. मैं तो दबी जा रही थी उसके बजन के नीचे. कहाँ मैं 45 किलो की कहाँ वो 90 किलो का. उसका मोटा लिंग मेरे नितंबो की दरार के उपर था और अंदर आने की कोशिस कर रहा था. मैं तो डर के मारे सहमी पड़ी थी. उपर से मुझे बाहर घूम रहे लोगो का भी डर था. रुकना चाहती थी मैं पर बात अब आगे निकल चुकी थी. ना मैं खुद को रोक सकती थी ना ही इस सुवर को. पता नही कैसा होगा अनल सेक्स. मुझे पता था कि दर्द बहुत होता है इसमे और नरेश तो गधा था पूरा पता नही मेरे मासूम नितंबो का क्या होगा आज.

नरेश ने मेरे नितंबो को फैलाया और और मेरे छेद पर थूक दिया दूर से. उसने तीन बार थुका मेरे छेद पर ताकि वो अच्छे से चिकना हो जाए.

“तू मेरे घर पे होती तो सरसो का तेल लगा देता तेरी गांड पर मगर यहाँ तेल कहाँ से मिलेगा. पर तू चिंता ना कर थूक से बात बन जाएगी.”

“ज़्यादा दर्द तो नही होगा ना.”

“तू चिंता मत कर थोड़ा तो होगा ही पर तू हिम्मत ना हारना.”

“आराम से डालना तुम, मुझे डर लग रहा है.” मैने धीरे से कहा.

“ऐसा कर तू दोनो हाथो से अपनी गांड जितना फैला सकती है फैला ले लंड को जाने में आसानी होगी.”

मैने दोनो हाथो से अपने दोनो नितंबों को थाम लिया और उन्हे नीचे की तरफ खींच कर उन्हे फैला दिया. अब मेरे नितंबो के बीच का गुलाबी होल उसके सामने था. उसना थोड़ा सा थूक अपने लिंग के मोटे सूपदे पर भी लगाया और फिर उसे मेरे मासूम गुलाब छेद पर टिका दिया.   “मैं एक झटका मारूँगा पहले ज़ोर से.”

“ज़ोर से क्यों आराम से करो ना.”

“तू नही समझेगी, गांड में आराम से कभी नही जाता लंड, पहला झटका ज़ोर का ही मारना पड़ता है.” वो बोला और खुद को आगे की ओर झटका दिया.

“उउऊयईीईईई मा मर गयी निकालो निकालो.” मैं दर्द से बिफर पड़ी. बेचैनी में मेरे हाथ भी मेरे नितंबो से हट गये. “निकालो इसे बाहर प्लीज़ मैं मर जाउन्गि आहह नूओ.”

“बस थोड़ी देर बस एक मिनिट सब ठीक हो जाएगा.” उसने मेरी गर्दन को चूमते हुवे कहा. वो मेरे उपर पड़ा था . वो भी पेट के बल मेरे उपर ही लेटा हुआ था. आधा लिंग अंदर धंसा हुआ था उसका मेरे नितंबो में और मैं दर्द से बहाल हो रही थी. अभी दर्द पूरा गया भी नही था कि उसने मेरे नितंबो को खुद ही दोनो हाथो से फैला कर ज़ोर से झटका मारा मेरी तो जान ही निकल गयी. मैने अपना हाथ मूह में दबा लिया कही मैं चिल्ला ना पडू.

कहानी जारी है …..

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