ज़ोर से क्यों आराम से करो ना 4

“हटो मुझे नही करना अनल सेक्स. ये बहुत बेकार है. जान निकल गयी मेरी.” मैं गुस्से में बोली.

मगर वो नही माना. उसने तो झटके मारने शुरू कर दिए. मैं बेबस सी पड़ी रही. वो अब मज़े से मेरी मार रहा था. उसके बोझ के नीचे मैं मरी जा रही थी.

“आआहह नो आआहह.” मैं सिसकिया लेने लगी.

“धीरे धीरे जानेमन कोई सुन लेगा.”

मुझे अब जन्नत का स्वाद आने लगा था. उसका मोटा लिंग बहुत तेज रफ़्तार से मेरे नितंब के छेद से अंदर बाहर हो रहा था. मुझे यकीन ही नही हो रहा था कि मेरे छ्होटे से छेद में उसका इतना मोटा औजार घुस्स गया था. अजीब करिश्मा था ये भी. हम दोनो पसीने से लटपथ हो गये थे.

“आहह बस रुक जाओ अब आआहह.” मैं झड़ने वाली थी.

“नही आज तेरी बहुत अच्छे से गांड मारूँगा साली हिहिहीही.” और उसने रफ़्तार और बढ़ा दी. मैं झाड़ गयी उसी वक्त. मगर जालिम नही रुका. वो मारे जा रहा था मेरी मासूम गांड को बड़ी बेरहमी से.

वो बीच बीच में मेरी पीठ को भी चूम रहा था.

“तुमने नैना को देखा क्या रमन?”

“अरे ये तो युवराज की आवाज़ है रूको.” मैने कहा.

“तो रहने दो मैं अब नही रुकने वाला.”

“नही तो भैया, क्या हुआ?” रमन ने कहा.

“पता नही कहाँ चली गयी ये अचानक. मम्मी बुला रही है उसे. अपना फोन भी नही उठा रही.”

मैने तुरंत अपना मोबाइल देखा जो कि पास ही पड़ा था मेरे. उसमे 20 मिस्ड कॉल थी. क्योंकि मोबाइल साइलेंट पे था इसलिए मुझे पता नही चला था कि युवराज कॉल कर रहा है.

“हटो मुझे जाना होगा.” मैने नरेश को धीरे से कहा.

“अभी तो मज़ा आने लगा है. मैं अब नही रुक सकता. पूरी गांड मार कर ही रुकुंगा.” वो ज़ोर से धक्का मारते हुवे बोला.

“देखो युवराज मुझे ढूंड रहा है, कुछ तो शरम करो और कितनी देर से तो कर रहे हो जी नही भरा तुम्हारा.”

“ऐसी गांड मिलेगी मारने को तो किसका जी भरेगा. इसे तो मैं दीन रात मारता रहूं हाई क्या मस्त गांड है उफ़फ्फ़.” उसने रफ़्तार बढ़ाते हुवे कहा. मैं रुक ना पाई और फिर से झाड़ गयी.

बाहर युवराज की आवाज़ आ रही थी और अंदर ये सुवर मेरे उपर पड़ा मेरी गांड मार रहा था. अजीब से सिचुयेशन थी ये. कुछ देर बाद युवराज की आवाज़ आनी बंद हो गयी और मैने राहत की साँस ली और फिर से पूरी तरह नरेश के धक्को में खो गयी.

मगर कुछ देर बाद दरवाजा खुला. मेरे तो पैरो के नीचे से ज़मीन ही खिसक गयी.

“स्टोर रूम है ये यार मोंटी चल यहाँ से.”

“क्या पता कुछ काम का समान हो रुक तो गुल्लू.”

मेरी तो साँस ही अटक गयी. नरेश भी तुरंत रुक गया. मगर वो ऐसी पोज़िशन में रुका था जबकि उसका लिंग सिर्फ़ सूपदे को छ्चोड़ का बाहर था. हम दोनो ही जड़ हो चुके थे. नरेश ने धीरे से खुद को नीचे किया और उसका मोटा लिंग मेरे अंदर फिसलता चला गया. ये बिल्कुल स्लो मोशन में हुआ. उसके ज़रा ज़रा सरकते हुवे लिंग को मैने अपने छेद की दीवारों पर बहुत अच्छे से महसूस किया. जब वो पूरा अंदर आ गया तो ना चाहते हुवे भी हल्की सी आहह मेरे मूह से निकल गयी. “आहह.”

“तूने ये आवाज़ सुनी क्या मोंटी?”

“हान्ं यार सुनी तो, चल भाग यहाँ से ज़रूर यहा भूत है.”

और वो दोनो दरवाजा बंद करके भाग गये. अब शायद उपर कोई नही था.

“निकाल लो अब बाहर और मुझे जाने दो. युवराज मुझे ढूंड रहा है.”

“नही अभी नही अभी तो बहुत मारनी है.” और वो फिर से शुरू हो गया.

“बाद में मार लेना मैं कही भागी नही जा रही हूँ प्लीज़ अभी मुझे जाने दो.” मैं गिड़गिडाई.”

“बाद में तू नही देगी मुझे पता है. अमर के साथ तूने जो किया क्या मुझे नही पता. तू रोज रोज नही देती अपनी. तेरा मूड होता है कभी कभी ये मैं जान चुका हूँ हिहीही. आज ही जी भर के मारूँगा तेरी मैं.”

और जालिम ने तूफान मचा दिया मेरे पीचवाड़े में. इतनी रफ़्तार से मारने लगा वो मेरी मासूम गांड को कि फ़च फ़च की आवाज़ होने लगी. कोई भी बाहर होता अब तो सुन सकता था. उउउहह बस भी करो आहह” और मैं फिर से झाड़ गयी.

“बस अब मेरी बारी है” और उसने रफ़्तार की चरम को छू लिया और फिर अचानक ऐसी पिचकारी छ्चोड़ी उसने कि मेरी गांड की दीवारे गरम गरम पानी में नहा गयी. ये गर्माहट मुझे बहुत गहरे तक महसूस हुई.

“आआहह बस रुक भी जाओ.” मैने कराहते हुवे कहा. मेरी योनि एक बार फिर पानी छ्चोड़ चुकी थी. अजीब बात थी गांड में तो मज़ा आ ही रहा था मगर मेरी चूत भी मस्ती में पानी बहा रही थी. यही बात शायद अनल सेक्स को ख़ास बनाती है. मैने मन ही मन सोचा.  उसने हान्फ्ते हुवे अपने लिंग को बाहर खींच लिया. मैं तुरंत लड़खड़ते कदमो से खड़ी हुई और तुरंत कपड़े पहनने लगी. जब मैने ब्लाउस, पॅंटी और पेटिकोट पहन लिया तो उसने मुझे बाहों में भर लिया और मेरे होंटो को अपने सुवर जैसे होंटो में जाकड़ कर चूसने लगा.उस से अलग हो कर मैने अपने कपड़े पहने और जल्दी से बाहर आ गयी. दोस्तो उस दिन मैं बाल बाल बची दोस्तो आपको ये मेरी आपबीती कैसी लगी प्लीज मुझे जरुर बताना धन्यवाद आपकी प्रीटी |

समाप्त

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